भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ अब अररिया जिले में अपनी जड़ें जमा रहा है। इस मिशन के तहत जिले के विभिन्न संस्थानों और निजी संग्रहकर्ताओं के पास मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और उन्हें डिजिटल रूप देने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है।
वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित इस फ्लैगशिप पहल का मुख्य लक्ष्य सदियों पुरानी पांडुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण करना है। इससे यह अमूल्य धरोहर न केवल सुरक्षित रहेगी, बल्कि शोधार्थियों और आम नागरिकों के लिए ‘ज्ञान भारतम् पोर्टल/ऐप’ पर एक क्लिक में उपलब्ध होगी।
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जिले में प्रशासनिक तैयारी
मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अररिया में पुख्ता प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है:
नोडल अधिकारी: अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), अररिया को मिशन का नोडल अधिकारी बनाया गया है।
सर्वेक्षण टीम: प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को सर्वेयर के रूप में नामित किया गया है।
निगरानी: कार्यों के पर्यवेक्षण के लिए एक विशेष सर्वेक्षण समिति का गठन किया गया है।
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अब तक का रिपोर्ट कार्ड: अररिया में मिलीं 26 महत्वपूर्ण पांडुलिपियाँ
प्रारंभिक सर्वेक्षण के दौरान जिले में कई व्यक्तिगत और संस्थागत संग्रहकर्ताओं की पहचान की गई है, जिनके पास ऐतिहासिक महत्व की पांडुलिपियाँ मौजूद हैं:
रामकृष्ण सेवा आश्रम, अररिया 01
कुंदन कुमार झा 06
चंदन कुमार झा 15
दक्षिणेश्वर प्रसाद रॉय 04
कुल 26
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पांडुलीपि उपलब्ध करवाने वाले संस्थान के प्रतिनिधि एवं व्यक्तियों को जिलाधिकारी अररिया विनोद दूहन द्वारा आज सम्मानित किया गया
कैसी पांडुलिपियों का हो रहा है चयन?
इस मिशन के तहत उन पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जा रही है जो:
75 वर्ष से अधिक पुरानी हों।
कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र या कपड़े पर हस्तलिखित हों।