पटना: बिहार के चिकित्सा जगत और शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों— PMCH (पटना), NMCH (पटना) और पावापुरी मेडिकल कॉलेज— के छात्र MBBS की परीक्षा में खुलेआम कदाचार (नकल) करने की जिद पर अड़ गए। हालात इतने बिगड़ गए कि परीक्षा केंद्र बने पटना साइंस कॉलेज ने परीक्षा आयोजित करने से ही मना कर दिया है।
मोबाइल और चिट-पुर्जों के साथ एंट्री की जिद
मिली जानकारी के अनुसार, परीक्षार्थी परीक्षा हॉल में बिना मोबाइल और चिट-पुर्जों के प्रवेश करने को तैयार नहीं थे। चौंकाने वाली बात यह है कि छात्रों के मोबाइल में प्रश्न-पत्र पहले से ही मौजूद थे, जिसके आधार पर उन्होंने नकल की सामग्री तैयार की थी। जब कॉलेज प्रशासन ने सख्ती दिखाई और मोबाइल अंदर ले जाने से रोका, तो छात्रों ने जमकर हंगामा किया।
मेधावी छात्रों का यह आचरण विचलित करने वाला
यह मामला इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि:
- प्रतिष्ठित संस्थान: PMCH और NMCH जैसे कॉलेजों में दाखिला नीट (NEET) की परीक्षा में बहुत ऊंची रैंक लाने के बाद ही मिलता है।
- सरकारी खर्च: इन छात्रों की पढ़ाई का अधिकांश खर्च सरकार (जनता के टैक्स का पैसा) वहन करती है ताकि देश को योग्य डॉक्टर मिल सकें।
- जीवन का सवाल: यदि नकल के भरोसे डॉक्टर बनेंगे, तो भविष्य में समाज के स्वास्थ्य और लोगों की जान के साथ क्या खिलवाड़ होगा, इसकी कल्पना करना भी भयावह है।
BPSC की तर्ज पर कठोर कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद अब सोशल मीडिया और प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:
- कठोर प्रतिबंध: जिस तरह बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) कदाचार में संलिप्त छात्रों को भविष्य की परीक्षाओं से डिबार (प्रतिबंधित) कर देता है, क्या इन मेडिकल छात्रों पर भी वैसी ही कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?
- पेपर लीक की जांच: मोबाइल में प्रश्न-पत्र पहले ही कैसे पहुंच गए? इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और पेपर लीक सिंडिकेट का पर्दाफाश होना चाहिए।






















