अररिया (बिहार) | 2 मई 2026
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर जन जागरण शक्ति संगठन (JJSS) द्वारा ताराबाड़ी हटिया में आयोजित ‘मजदूर मेला’ में हजारों की संख्या में मजदूरों का जनसैलाब उमड़ा। इस मेले के माध्यम से न केवल मनोरंजन हुआ, बल्कि वर्तमान समय में मजदूरों के सामने खड़ी चुनौतियों और उनके अधिकारों को लेकर एक साझा संकल्प भी लिया गया।
मेले का आकर्षण: नृत्य, गीत और संदेश
आमतौर पर लगने वाले मेलों से इतर, यह ‘मजदूर मेला’ जिज्ञासा का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी नृत्य और क्रांतिकारी गीतों के साथ हुई। मेले के परिसर को महान विभूतियों के प्रेरक कथनों वाले पोस्टरों से सजाया गया था। साथ ही, वहाँ किताब, औजार, कपड़े और खिलौनों के स्टॉल लगे थे, जहाँ दिनभर लोगों की भीड़ बनी रही। स्थानीय छोटे दुकानदारों ने भी इस मेले में जमकर कारोबार किया।
प्रमुख मांगें: जीने लायक मजदूरी और काम का अधिकार
सभा को संबोधित करते हुए जन जागरण शक्ति संगठन के सचिव आशीष रंजन ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
”हमें सिर्फ मजदूरी नहीं, बल्कि ‘जीने लायक’ मजदूरी चाहिए। हम मांग करते हैं कि न्यूनतम मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन तय की जाए।”
उन्होंने मनरेगा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों के हक को छीनकर सरकार ‘वी बी ग्राम जी’ कानून लाई है, जो अब तक कागजों पर ही है। मनरेगा के खत्म होने से ग्रामीण बेरोजगारी चरम पर है, जिसे नोएडा के मजदूर आंदोलनों के संदर्भ में समझने की जरूरत है।

जाति-धर्म की राजनीति को दी चुनौती
संगठन के महासचिव जितेंद्र पासवान ने मजदूरों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज मजदूरों को जाति और धर्म के नाम पर बांटकर उनके बुनियादी मुद्दों को दबाया जा रहा है। हमारी सबसे बड़ी और पहली पहचान ‘मजदूर’ की है।
महिला नेत्री मांडवी देवी ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और समान काम के लिए समान वेतन का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि मनरेगा बंद होने से सबसे ज्यादा मार ग्रामीण महिलाओं पर पड़ी है।
नफरत के खिलाफ एकजुटता का संकल्प
मेले में मौजूद हजारों लोगों ने एक स्वर में जाति-धर्म की राजनीति को परास्त करने और समाज में फैल रही नफरत का मुकाबला करने का संकल्प लिया।
इनकी रही गरिमामय उपस्थिति:
सभा की अध्यक्षता कृष्ण कुमार सिंह ने की और मंच का संचालन प्रियंका ने किया। कार्यक्रम को कामायनी स्वामी, सब्यसाची सेन, रणजीत पासवान, दीपनारायण पासवान, फूलकुमारी देवी और रीना सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
मुख्य बिंदु:
- न्यूनतम मजदूरी: ₹800 प्रति दिन करने की मांग।
- रोजगार: मनरेगा को पुनः बहाल करने पर जोर।
- समानता: महिला मजदूरों को समान वेतन और सुविधाएं मिले।
- एकजुटता: जाति-धर्म से ऊपर उठकर मजदूर आंदोलन को मजबूत करने का फैसला।






















